कैसे राहुल गांधी की पसंद को छोड़, अपने चहेते को राज्यसभा का टिकट दिलवा गए दिग्विजय और कमलनाथ; इनसाइड स्टेारी

कैसे राहुल गांधी की पसंद को छोड़, अपने चहेते को राज्यसभा का टिकट दिलवा गए दिग्विजय और कमलनाथ; इनसाइड स्टेारी

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राहुल गांधी की पसंद को छोड़ दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के चहेते को राज्यसभा का टिकट मिल गया है। दरअसल, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की मर्जी पर दो दिग्गज नेताओं की पसंद को तवज्जो राज्यसभा चुनाव में दी गई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी चाहते थे कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा का टिकट वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को दिया जाए, जबकि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ अशोक सिंह को देना चाहते थे। ऐसे में आखिरकार, मीनाक्षी नटराजन का टिकट काटकर अशोक सिंह को ही राज्यसभा की उम्मीदवारी दी गई। 

अशोक सिंह की प्रोफ़ाइल दिलचस्प है, क्योंकि वह ग्वालियर से लगातार चार लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। हालांकि तब भी उनके समर्थक बचाव में यह तर्क दे रहे हैं कि वह एक कड़े मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्र में कम अंतर से दूसरे स्थान पर आए थे। हालांकि, उनके पक्ष में काम करने वाली बात यह थी कि उन्होंने पार्टी के काफी अंदरूनी व्यक्ति रह चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया का कड़ा विरोध किया था। इसी वजह से उन्हें प्राथमिकता दी गई। सिंधिया के पार्टी से बाहर जाने और हालिया विधानसभा चुनावों में प्रमुख नेताओं की हार के बाद कांग्रेस अब ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अपनी धाक फिर से जमाने की जुगत में है। इसके अलावा अशोक सिंह का ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) होना भी काम कर गया।

लेकिन सूत्रों ने कहा कि सिंह की साख इस बार रहस्यमय तरीके से दो पक्षों में हो गई है। जबकि उन्हें दिग्विजय सिंह के वफादार के रूप में जाना जाता है। कहा जा रहा है कि चूंकि कमलनाथ खुद राज्यसभा जाना चाहते थे, लेकिन जब उनकी उम्मीदवारी को केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी नहीं मिली तो उन्होंने अशोक सिंह को आगे कर दिया। अब अनुमान यह है कि एक बार जब कमलनाथ ने ही दिग्विजिय सिंह को अशोक सिंह का नाम सुझाया और वो सहमत हो गए। दूसरी ओर राहुल गांधी ने संसद के उच्च सदन के लिए मीनाक्षी नटराजन को प्राथमिकता दी। नटराजन ने पहले 2009 में मंदसौर लोकसभा सीट जीती थी, लेकिन उसके बाद से उन्हें लगातार चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। एक सहयोगी के रूप में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के भीतर राहुल के दिल के करीब परियोजनाओं की देखरेख की है।

हालांकि, कमलनाथ नटराजन के नामांकन का अंत तक विरोध करते रहे। जब उन्होंने नेतृत्व के साथ अपनी अंतिम बातचीत में नरमी बरतने से इनकार कर दिया तो ऐसा लगता है कि पार्टी अशोक सिंह के नाम पर सहमत हो गई है। कमलनाथ के नेतृत्व में हाल के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद मध्य प्रदेश नेतृत्व में विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद पार्टी नेतृत्व ने पहले ही एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक दल के नेता उमंग सिंघार की नियुक्ति में अपना प्रभाव जता दिया था। हालांकि, इस विशेष उदाहरण से ऐसा लगता है कि केंद्रीय नेतृत्व कमलनाथ को एक हद के बाद नाराज नहीं करना चाहता है।

 

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