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हाल ही में पाकिस्तान में हुए आम चुनावों को लेकर अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों ने सवाल उठाए थे। अमेरिका ने जांच कराने की बात तक कही थी। अब भारत में भी आम चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में क्या अमेरिका भारत में चुनावी निगरानी करेगा? इस सवाल को लेकर अमेरिका ने दो टूक जवाब दिया। उसने कहा है कि वह भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ ऐसा नहीं करता है।
इसके साथ ही अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने भारत में जारी लोकसभा चुनावों के बीच कहा कि वह वहां कोई चुनाव पर्यवेक्षक नहीं भेज रहा है, लेकिन वह भारत में साझेदारों के साथ अपने सहयोग को गहरा और मजबूत करने के लिए उत्सुक है। विदेश मंत्रालय के उपप्रवक्ता वेदांत पटेल ने बृहस्पतिवार को अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे अमेरिका द्वारा कोई पर्यवेक्षक भेजे जाने की जानकारी नहीं है। हम भारत जैसे उन्नत लोकतांत्रिक देशों में चुनावों के मामले में आम तौर पर ऐसा नहीं करते हैं।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘हम भारत में अपने साझेदारों के साथ अपने सहयोग को गहरा और मजबूत करने के लिए निश्चित रूप से उत्सुक हैं।’’ भारत में लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत शुक्रवार को देश की 102 सीट पर मतदान हो रहा है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में रूस-यूक्रेन संघर्ष या गाजा में जारी युद्ध के मद्देनजर शांति स्थापित करने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत विश्व के नेताओं द्वारा भूमिका निभाने के विचार का स्वागत किया।
इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने पाकिस्तानी चुनाव के बाद कहा था कि हस्तक्षेप या धोखाधड़ी के किसी भी दावे की ‘पाकिस्तान के अपने कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुसार पूरी तरह और पारदर्शी तरीके से जांच की जानी चाहिए।’ उन्होंने कहा, “रिपोर्ट की गई अनियमितताओं की जांच के संबंध में, हम उन जांचों को आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं।”
मिलर चुनावों पर चिंता व्यक्त करने वाले एकमात्र अमेरिकी अधिकारी नहीं हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी के ग्रेगोरियो कैसर के नेतृत्व में लगभग 35 कांग्रेस सदस्यों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन और राज्य सचिव एंटनी ब्लिंकन को पत्र लिखकर चुनाव के बाद इस्लामाबाद में बनी नई सरकार को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया है।
(इनपुट एजेंसी)
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