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नोएडा में आशियाना खरीदने की चाह रखने वालों की राह कठिन होती जा रही है। यहां संपत्ति की दरें लगातार ऊंचाइयां छू रही हैं। सरकारी आंकड़ों में ही पिछले 15 वर्षों में संपत्ति की दरें चार गुना तक बढ़ गईं। बाजार की कीमतें तो इससे भी एक से डेढ़ गुना अधिक हैं।
नोएडा प्राधिकरण की शुक्रवार को हुई बोर्ड बैठक में आवासीय संपत्तियों की दरों में छह प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। पिछले साल भी अलग-अलग श्रेणी में छह से 10 प्रतिश तक की बढ़ोतरी हुई थी। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2008-09 में सबसे पहले ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 39600 और सस्ते यानि ई श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 14400 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। वर्ष 2015-16 में सबसे महंगे ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 81400 और सस्ते सेक्टरों की आवंटन दर 29600 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी।
प्राधिकरण ने वर्ष 2019-20 में सेक्टरों की नई ए प्लस श्रेणी बना दी, जिसमें सेक्टर-14ए, 15ए, 44 के ए और बी ब्लॉक तय किए गए। अब इन सेक्टर की आवंटन दर 175000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गई है। ए श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर भी अब बढ़कर 125340 हो गई है। इनके अलावा सबसे सस्ते यानि ई श्रेणी के सेक्टरों की आवंटन दर 48110 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है।
सरकारी आंकड़ें को छोड़ दें तो बाजार में इससे अधिक संपत्ति की दरें हैं। जानकारों का कहना है कि श्रेणी ए प्लस के सेक्टरों का रेट 4 से 5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है। ए श्रेणी के सेक्टरों का रेट भी दो से ढाई लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर पहुंच गया है। सबसे सस्ते सेक्टरों का रेट एक लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास है। करीब 10-12 साल पहले तक नोएडा प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं का आवंटन ड्रॉ के माध्यम से होता था, लेकिन अब यहां ऑनलाइन बोली लगती है।
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ऐसे तय होती हैं आवंटन दरें : प्राधिकरण के अनुसार भू-लागत की गणना में भू-अर्जन व्यय, आंतिरक व बाहरी विकास व्यय, अनुरक्षण लागत, आकस्मिक व्यय, प्रशासनिक व्यय एवं रिजर्व फॉर स्टेट ऑफ आर्ट फेसिलिटीस के लिए प्रावधान करने के उपरांत बेसिक भू-लागत की गणना की जाती है। इसको कुल क्षेत्रफल में से 55 प्रतिशत विक्रय योग्य क्षेत्रफल के आधार पर मूल भू-लागत की गणना की जाती है। इसके बाद आगणित दर आवासीय श्रेणी की निम्नतम यानि ई श्रेणी की निर्धारित की जाती है। इसके आधार पर ही अन्य श्रेणियों की दरें तय होती हैं।
आवासीय भूखंडों की नई आवंटन दरें
श्रेणी नई दरें
ए प्लस 75000 रुपये प्रति वर्गमीटर
ए 25340 रुपये प्रति वर्गमीटर
बी 87370 रुपये प्रति वर्गमीटर
सी 63620 रुपये प्रति वर्गमीटर
डी 53180 रुपये प्रति वर्गमीटर
ई 48110 रुपये प्रति वर्गमीटर
शहर में संपत्ति महंगी होने के कारण
● दिल्ली से नजदीकी, रोजगार और व्यवसाय के बेहतर विकल्प, मेट्रो, बस, ऑटो की बेहतर कनेक्टिविटी
● सड़क, बिजली और पानी की बेहतर सुविधा, बेहतर स्कूल, कॉलेज और अस्पताल
नोएडा प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स एसोसिएशन के महासचिव भूपेंद्र शर्मा ने कहा, ”सुविधाओं और दिल्ली से सटा होने की वजह से नोएडा में संपत्ति की दरें बीते चार-पांच वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। आने वाले समय में इसी रफ्तार से रेट बढ़ेंगे, इसकी उम्मीद कम है। यहां पर खाली संपत्ति का दायरा सीमित रह गया है।”
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