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दिल्ली की मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने एक इंश्योरेंस कंपनी को 4 साल पुराने हिट एंड रन मामले में लगभग 2 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। 2016 में एक नाबालिग द्वारा चलाई गई कार की टक्कर में मारे गए 32 वर्षीय व्यक्ति के माता-पिता को लगभग ₹1.98 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को 30 दिनों के अंडर सिद्धार्थ शर्मा के माता-पिता को 1.98 रुपए करोड़ देने का फैसला सुनाया है। मुआवजे की इस रकम में 1.21 करोड़ रुपए मुआवजे और लगभग ₹77.61 लाख ब्याज के रूप में भुगतान करने को कहा गया है।
4 अप्रैल 2016 को दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में एक नाबालिग ने अपनी मर्सिडीज से 32 वर्षीय सिद्धार्थ शर्मा को ठोक दिया जिससे उसकी मौत हो गई थी। यह घटना पास ही में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद भी हो गई थी। ट्रिब्यूनल ने नाबालिग के पिता को भी अपने नाबालिग बेटे को ड्राइविंग करने से रोकने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में उसे पहले भी चेतावनी दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, “अपने नाबालिग बेटे को मर्सिडीज चलाने से रोकने के बजाय, उसने इसे अनदेखा करना चुना, जो उनकी सहमति को दिखाता है। दुर्घटना के समय वह घर पर था, लेकिन उसने अपने बेटे को घर से मौज-मस्ती के लिए कार ले जाने से नहीं रोका।”
क्या था पूरा मामला
सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि सिद्धार्थ शर्मा दोनों तरफ देखते हुए सड़क पार करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने थोड़ी देर पहले ही एक नूडल स्टैंड से टेकआउट खरीदा था और घर की तरफ लौट रहे थे। सड़क पार करते समय सिद्धार्थ को एहसास हुआ कि कार की स्पीड कम नहीं हो रही है। उसने रास्ते से हटने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सका। सिद्धार्थ शर्मा को टक्कर मारने के बाद मर्सिडीज फुटपाथ पर जा गिरी और उसके अगले टायर फटने की वजह से गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं नाबालिग किशोर कार छोड़कर अपने दोस्तों के साथ वहां से भाग गया। अदालत ने बीमा कंपनी को पिता की कंपनी से मुआवज़ा राशि वसूलने की छूट दी है जिसके नाम पर गाड़ी रजिस्टर्ड थी। पुलिस द्वारा फाइल किए गए रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग बहुत तेज़ गति से कार चला रहा था। टक्कर के बाद, कार की टक्कर से सिद्धार्थ 20 फीट ऊपर हवा में उछल गया था।
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