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पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजनीति ने भी एक से बढ़कर एक चेहरे और चमत्कार देखे हैं। 1980 के दशक में जब कपड़ा का कारोबार करने वाले दो भाइयों ने राजनीति में एंट्री ली तो फिर पंजाब के मुख्यमंत्री का पद से लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तक का पद संभाला। राजनीति, कारोबार, ब्यूरोक्रेसी, सेना, ज्यूडिशियरी तक में अपना प्रभाव रखने वाला यह परिवार पाकिस्तान की सियात में ‘गुजरात के चौधरी’ नाम से मशहूर है। एक समय ऐसा भी आया, जब अपनी मजबूत सियासी पकड़ की वजह से ही इस परिवार को पाकिस्तान का किंगमेकर कहा जाने लगा। यह परिवार कभी नवाज शरीफ के साथ रहा तो कभी आसिफ अली जरदारी तो कभी इमरान खान के साथ।
राजनीति की शुरुआत कहां से
यह परिवार मूलत: पंजाब प्रांत के गुजरात जिले का रहने वाला है, जो 1939 में अमृतसर से पलायन कर यहां आकर बसा था। परिवार मूल रूप से जाट परिवार रहा है। इस परिवार की सियासी कथा शुरू होती है चौधरी जहूर इलाही से, जिन्होंने 1956 में राजनीति में प्रवेश किया थ। जहूर के दूसरे भाई चौधरी मंजूर इलाही ने तब पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया था। दो साल बाद ही जहूर इलाही जिला बोर्ड के अध्यक्ष पद पर जीत गए। इसके बाद वह बतौर सांसद नेशनल असेंबली के लिए भी चुने गए। बाद में वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग के बड़े नेता बन गए।
एक बना PM तो दूजा CM
1970 के दशक में जब जुल्फिकार अली भुट्टो का शासन आया, तब जहूर इलाही पर तमाम तरह की बंदिशें लगाई गईं पर वो नहीं रुके। वह लगातार विपक्षी ताकत के रूप में उभरते रहे लेकिन 1981 में मुर्तजा भुट्टो ने उनकी हत्या करवा दी। इसके बाद चौधरी परिवार ने फैसला किया कि घर के दो बेटे चौधरी शुजात हुसैन और चौधरी परवेज इलाही (दोनों चचेरे भाई) अब राजनीति में पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे। इसके बाद चौधरी भाइयों ने 1980 के दशक से ही मध्य पंजाब की राजनीति पर बेजोड़ प्रभाव डाला। इनमें से एक प्रधानमंत्री तो दूसरा पंजाब का मुख्यमंत्री बना।
चौधरी परवेज इलाही का सफर
चौधरी परवेज इलाही की असल कहानी शुरू होती है 1985 से, जब उन्होंने पंजाब असेंबली का चुनाव जीता और मंत्री बनाए गए। परवेज 1985 से 1993 तक मंत्री रहे। वह 1985, 1988, 1990 और 1993 का असेंबली चुनाव जीतते गए। वह 1993 से 1996 के बीच नेता विपक्ष भी रहे। इस दौरान चौधरी परिवार नवाज शरीफ के काफी करीब आ गया था। जब बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान वापसी हुई तो दो परिवारों की निकटता और गहरी हो गई।
दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव तब पैदा हुआ, जब 1990 के चुनाव के दौरान नवाज शरीफ़ ने परवेज़ इलाही को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था, लेकिन बाद में शरीफ की सरकार बन जाने के बाद वो अपने वादे से मुकर गए। शरीफ ने उनकी जगह गुलाम हैदर वाइन को तरजीह दी गई और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।
नवाज शरीफ ने दिया धोखा
1997 के चुनावों के दौरान एक बार फिर परवेज़ इलाही को मुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया, लेकिन शहबाज़ शरीफ़ ने भी बड़े भाई की तरह उनके पैरों के नीचे से जमीन खींच ली। शहबाज सीएम बनाए गए जबकि परवेज को पंजाब विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया। चौधरी परिवार को अब तक एहसास हो चुका था कि शरीफ को उन पर पूरा भरोसा नहीं है, लेकिन गुजरात के चौधरी भाइयों ने अभी तक पार्टी नहीं छोड़ने का फैसला किया। जब
दोनों भाइयों ने छोड़ी PML-N
1999 में जब नवाज शरीफ का तख्तापलट हुआ, तब परवेज इलाही पर भी गाज गिरी। उन्हें भी नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने कई मामलों में नामित किया लेकिन पाकिस्तान मुस्लिम लीग को छोड़कर उन्होंने अपने खिलाफ साजिशों से छुटाकारा पाया। तब परवेज ने अपने चचेरे भाई शुजात खान के साथ मिलकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू बना लिया। 2002 में जब फिर से असेंबली चुनाव हुए तो परवेज इलाही छठी बार जीते। और इस बार वह पंजाब के मुख्यमंत्री बने। वह 2002 से 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे।
जब दिसंबर 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या हुई, तब चौधरी परिवार फिर से सुर्खियों में रहा। बेनजीर की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने परवेज इलाही पर बेनजीर की हत्या कराने का आरोप लगाया। उनके साथ-साथ जनरल परवेज मुशर्रफ और तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख इजाज शाह पर भी उंगली उठाई गई। 2008 में परवेज ने फिर से नेशनल असेंबली का चुनाव जीत लिया। इसके कुछ साल बाद चौधरी परिवार ने बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी से हाथ मिला लिया और गठबंधन में शामिल हो गए। तब परवेज़ इलाही को उपप्रधानमंत्री बनाया गया था।
परिवार में टूट
गुजरात के चौधरी परिवार में अब टूट हो चुकी है। परवेज इलाही पीटीआई की तरफ हैं तो शुजात चौधरी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-क्यू में हैं। 2022 तक आते-आते परवेज इलाही ने सियासी ट्रैक बदला और इमरान खान के साथ हो लिए। वह इमरान खान की मदद से दूसरी बार जुलाई 2022 से जनवरी 2023 तक पंजाब के सीएम रहे। वह 7 मार्च 2022 से 13 जनवरी 2024 तक इमरान खान की पार्टी पीटीआई के अध्यक्ष रहे। दूसरी तरफ उनके चचेरे भाई शुजात खान अभी भी पीएमएल-क्यू में ही हैं। वह 30 जून 2004 से 23 अगस्त 2004 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
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