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Setback for Xi Jinping : मध्य अमेरिकी देश निकारागुआ ने चीन को बड़ा झटका देते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अति महत्वाकांक्षी परियोजना को रद्द कर दिया है। दरअसल, चीन ने लैटिन अमेरिकी देशों में अपनी पहुंच को मजबूत और व्यापक बनाने के इरादे से अटलांटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ने के लिए निकारागुआ में एक नहर बनाने की योजना बनाई थी लेकिन करीब एक दशक बाद निकारागुआ ने उस नहर के निर्माण की विवादास्पद योजना को रद्द कर दिया है।
निकारागुआ के पूर्व में अटलांटिक महासागर है, जबकि पश्चिम में प्रशांत महासागर है। इन दोनों को जोड़ने के लिए चीन ने निकारागुआ से एक नहर बनाने का प्रस्ताव निकारागुआ को दिया था। लेकिन आलोचकों ने इस चीनी परियोजना के कई साइड इफेक्ट्स बताए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक निकारागुआ में नहर बनाने से पर्यावरण को खतरा पहुंचने और बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों के विस्थापित होने का खतरा था। इसलिए निकारागुआ ने चीन की विवादास्पद योजना को रद्द कर दिया है।
बता दें कि 10 साल पहले 2014 में इस नहर का शिलान्यास भी हो चुका था लेकिन अभी तक दोनों महासागरों को जोड़ने वाली इस नहर के निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका था। वहां हजारों किसानों ने इस विवादित योजना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया था।
नहर का क्या महत्व
अगर यह परियोजना पूरी हो जाती तो पनामा नहर इससे काफी पीछे छूट जाती। फिलहाल इन दोनों महासागरों के बीच जाने का रास्ता पनामा नहर से होकर ही गुजरता है। निकारागुआ नहर की लंबाई 172 मील प्रस्तावित थी। इसके निर्माण पर 50 अरब डॉलर का खर्च होना था।
हालांकि, यह नहर मध्य अमेरिका की सबसे बड़ी झील निकारागुआ झील को दो भागों में विभाजित कर देती, जबकि कैरिबियन तट पर संरक्षित रामा और क्रियोल समुदाय के लोगों समेत करीब सवा लाख आबादी को जबरन विस्थापित कर देती। इन सबके बावजूद अगर ये नहर का निर्माण होता तो वहां हजारों लोगों को नौकरियां भी मिलतीं।
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