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दुनियाभर के वैश्विक नेता स्विट्जरलैंड में आज युक्रेन शांति वार्ता के पहुंचे हुए हैं। इस वार्ता का लक्ष्य रूस के ऊपर दबाव डालकर युक्रेन में चल रहे युद्ध को रोकना हैं लेकिन इस समय रूस के सबसे बड़े सहयोगी चीन का इस में न शामिल होना इस वार्ता के लक्ष्य को जरूर कमजोर करेगा।
अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और उनके साथ-साथ बिट्रेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान के लीडरों का यहां पहुंचना संभावित हैं युक्रेन के राष्ट्रपति ब्लोमिदीर जेलेंस्की यहां आज होने वाली मीटिंग के लिए पहुंच चुके हैं।
जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने इसे शांति की तरफ उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम बताया, एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा के संबंध में कई सवाल हैं जिनके जबाव ढूंढ़े जाएंगे। सभी को मिलकर इस प्रयास को सफल बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
रूस के सहयोगी देशों में से भारत, तुर्की और हंगरी के इस वार्ता में शामिल होने की संभावना है लेकिन चीन के इसमें शामिल न होने के कारण पश्चिमी देशों के रूस पर दबाव डालने के लक्ष्य को धक्का जरूर लगा है। चीन की तरफ से इसे एक व्यर्थ का प्रयास कहकर इसमें भाग लेने से मना कर दिया गया। चीन के न आने को लेकर जेलेंस्की ने चीन पर आरोप लगाया कि वह सम्मेलन को कमजोर करने में रूस की मदद कर रहा है। जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों से इनकार किया।
रूस ने रखीं अपनी शर्तें
स्विट्जरलैंड में होने वाली शांति वार्ता से पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि अगर युक्रेन नाटों में शामिल होने के अपने फैसले को बदल ले और उन चार प्रदेशों, जिन पर रूस ने नए देशों की घोषणा की है उन पर से अपना अधिकार छोड़ दे तो हम युद्ध को खत्म कर देंगे। अमेरिका और युक्रेन ने रूस की इन मांगों को मानने से इनकार कर दिया। लेकिन रूस की तरफ से इस तरह की मांग होना यह साबित करता है कि रूस युद्ध में मजबूत स्थिति में हैं। रूस ने यूक्रेन में अपने विशेष सैन्य अभियान को पश्चिम के साथ व्यापक संघर्ष का हिस्सा बताया है।
160 देशों को निमंत्रण, शामिल हो रहे महज 90
सामने आई खबरों के मुताबिक युक्रेन शांति वार्ता के लिए करीब 160 देशों को निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन महज 90 देश ही इस समिट में हिस्सा ले रहे हैं। रूस पर दबाव बनाने के लिए हो रहे इस समिट में ग्लोबल साउथ के कई देशों के शामिल न होना, पश्चिमी देशों के रूस को दुनिया से अलग-थलग करने के प्रयास को एक बड़ा झटका लगा है।
भारत की तरफ से कौन होगा शामिल
युक्रेन पीस समिट में भारत ने एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है। युक्रेनी राष्ट्रपति ने इटली में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी से मुलाकात की। बैठक के बाद एक बयान में जेलेंस्की ने कहा कि पीस समिट में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद।
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