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Kerala High Court News: केरल हाई कोर्ट ने पिता के हत्यारे को राहत देते हुए उसकी तारीफ भी कर डाली। असल में यह युवक पिछले साल से जेल में बंद है। उसने कई बार जेल से छुट्टी की मांग की, लेकिन हर बार उसकी मांग ठुकरा दी जाती। हारकर युवक ने हाई कोर्ट का रुख किया और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खुद ही अपना केस लड़ने लगा। अब कोर्ट ने युवक की अपील मान ली है। सिंगल जज जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने युवक को राहत देते हुए जेल अधिकारियों के लिए निर्देश भी जारी किया है। इसमें कहा गया है कि उसे नियमों के मुताबिक कुछ दिनों के लिए छोड़ा जाए। जस्टिस कुरियन थॉमस ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने सेंट्रल जेल से खुद ऑनलाइन अपना केस लड़ा। इस दौरान उसका कौशल और प्रवाह दोनों शानदार थे। कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और करेक्शन सर्विस को रूल 397(बी) के तहत दो हफ्ते के अंदर 15 दिन की ऑर्डिनरी लीव देने का आदेश दिया।
यह मामला है एलेन थॉमस का। वह अपने पिता की हत्या के जुर्म में 2018 से जेल में बंद है। ट्रायल कोर्ट ने उसे इस मामले में आजीवन कारावास की सजाई सुनाई है। छह साल की कैद के दौरान एलेन को कभी भी ऑर्डिनरी लीव नहीं मिली। थॉमस का तर्क है कि जेल के अंदर उसका आचरण काफी अच्छा है। उसका यह भी तर्क है कि गैकानूनी ढंग से उसकी ऑर्डिनरी लीव पर पाबंदी लगा दी जा रही है और इसे विचार के लिए एडवाइजरी बोर्ड तक ले ही नहीं जाया जा रहा। वहीं, जेल अधीक्षक ने अदालत को बताया कि थॉमस बिना किसी उचित बहाने के जेल की नौकरियों से दूर रहे हैं। यह तर्क दिया गया था कि इस तरह का बुरा आचरण उन्हें केरल जेल और सुधार सेवा (प्रबंधन) अधिनियम, 2010 के अनुसार छुट्टी के लिए अयोग्य बनाता है। यह भी बताया गया कि जेल सलाहकार बोर्ड के साथ-साथ छुट्टी समीक्षा समिति ने उनके मामले पर विचार करने के बाद उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। वजह, पुलिस की रिपोर्ट उनके खिलाफ थी।
अदालत ने पुलिस रिपोर्ट का भी अध्ययन किया और कहा कि यह बेहद अस्पष्ट है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अस्पष्ट रिपोर्ट साधारण छुट्टी से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है। थॉमस के आचरण के संबंध में जेल अधीक्षक की दलील के बारे में अदालत ने कहा कि अच्छा व्यवहार केरल जेल और सुधार सेवा (प्रबंधन) अधिनियम, 2010 में परिभाषित नहीं किया गया है, जबकि छुट्टी के लिए पात्रता तय करने के लिए शर्तों का इस्तेमाल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि अच्छा व्यवहार अलग-अलग लोगों पर अलग ढंग से लागू होता है। एक सजायाफ्ता के संबंध में अच्छे व्यवहार को संकुचित ढंग से या किसी स्वतंत्र व्यक्ति के हिसाब से नहीं देखा जाना चाहिए।
इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि थॉमस का कोई अन्य आपराधिक इतिहास नहीं था। उसने अपने पिता की हत्या उनके अपमानजनक व्यवहार, अवैध संबंध और घरेलू हिंसा को लेकर की थी। कोर्ट ने आगे कहा कि हत्या के समय, थॉमस ने कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा करने के बाद बीटेक में एडमिशन लिया था। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के बाद रोजगार की तलाश कर रहा था। यह भी देखा गया कि जब ट्रायल से पहले वह जमानत पर बाहर था तो कानून-व्यवस्था को उसने किसी तरह का खतरा नहीं पहुंचाया।
यह घोषणा करते हुए कि थॉमस साधारण छुट्टी के लिए एलिजिबल हैं, कोर्ट ने दोषियों को छुट्टी देने का महत्व भी बताया। परिवार और समाज के साथ जुड़ने से दोषी के अंदर अपराध को दोहराने की भावना कम हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि इससे आशा और आत्मविश्वास पैदा होता है, जिससे कैदी को सुधरने मौका मिलता है। लंबे समय तक सामान्य छुट्टी से इनकार करने से नुकसान हो सकता है। यहां तक कि व्यक्ति के व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है।
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